दूसरा वर्ष · 25 दिसंबर 2016
2015 से सबक लेते हुए इस वर्ष स्वयं की किचन व्यवस्था की गई। बबलू हलवाई की टीम को कैटरिंग दी गई — आलू-टमाटर की सब्जी और गरमा-गरम पूड़ियाँ। भोजन सुबह 9:00 बजे से शाम तक चला। सबने प्रशंसा की।
सूरजपाल एडवोकेट जी को पुनः 2 महीने के लिए पूर्णकालिक प्रचारक नियुक्त किया गया। विनोद बौद्ध, योगेश चित्रसेन, डालचंद गौतम, सुशील प्रेमी, के.पी. सिंह व संघमित्रा गौतम जी का विशेष योगदान।
पूर्णतः चंदा से। कलेक्शन बुक छपवाई गई। अनुमानित बजट लगभग ₹6 लाख। आयोजन सफल रहा, पर समिति को वित्तीय कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा।
यह मात्र प्रोग्राम नहीं, धार्मिक-सांस्कृतिक उत्सव था। लोग उमंग और उत्साह के साथ अपनी भावनाएँ व्यक्त कर रहे थे।
अमृता टेंट एंड डेकोरेशन — श्रद्धेय नरेश गौतम जी (अब अध्यक्ष भी)। 300×250 वर्ग फुट टेंट, 20×20×40 स्टेज, ट्रस पिलर मंच, सोफे, कवर कुर्सियाँ, कारपेटिंग, आकर्षक मुख्य द्वार तथा 500 मीटर दायरे में 2 स्वागत द्वार (पंचशील झंडे)।
समिति ने संकल्प लिया कि सभी सदस्य कठोर अनुशासन में रहकर उच्च मापदंड स्थापित करेंगे। दिशा-निर्देशों का पालन दायित्व था; अनुशासनहीनता पर कठोर कार्रवाई की बात कही गई। अधिकतर सदस्यों ने ईमानदारी से पालन किया।
100 से अधिक वॉलिंटियर; 15 को वॉकी-टॉकी। गेट, ग्राउंड, पार्किंग, मंच के बीच तालमेल।
₹200 फिक्स कलेक्शन बुक से सैकड़ों गाँव से सामूहिक बस। महिलाओं-बच्चों की भागीदारी लगभग 60%। पंचशील झंडे व पटके वितरित।
25 दिसंबर 2016 को बहुजन स्वाभिमान दिवस के रूप में आयोजित दूसरा उत्सव ऐतिहासिक रूप से सफल रहा।